देहरादून : बागेश्वर के जिला चिकित्सालय मे लापरवाही के चलते एक बच्चे की जान चली गई थी। विगत जुलाई 2025 को अस्पताल में एक फौजी के बेटे को इलाज नहीं मिलने से मौत हो गई थी। तब मुख्यमंत्री ने ही जांच के आदेश दिए थे।
बच्चे को ग्वालदम,बैजनाथ,बागेश्वर समेत कई अस्पतालों में रेफर किया गया था। इस प्रकरण में मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्वास्थ्य महकमे ने इसे अधिकारियों और मेडिकल स्टाफ की बड़ी लापरवाही बताया । बागेश्वर के जिला अस्पताल में बच्चे की मौत के मामले में डॉक्टरों, अधिकारियों और मेडिकल स्टाफ को कारण बताओं नोटिस जारी किया गया है।
मेडिकल स्टाफ की तरफ से नोटिस का जवाब मिलने के बाद बागेश्वर के जिलाधिकारी की विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है। बागेश्वर जिला अस्पताल के प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर तपन शर्मा को असंवेदनशीलता, एम्बुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं करने और प्रशासनिक अक्षमता के चलते तत्काल प्रभाव से पद से अवमुक्त कर दिया है और उन्हें निदेशक कुमाऊं मंडल के साथ अटैच किया है। इसी तरह 108 एंबुलेंस चालक ईश्वर सिंह टोलिया और लक्ष्मण कुमार पर कर्तव्यों के प्रति उदासीनता और असंवेदनशीलता के आरोपों पर एक माह तक के लिए कार्य से विरक्त रहने के आदेश दिए गए हैं, उनपर अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। बागेश्वर अस्पताल में तैनात नर्सिंग अधिकारी महेश कुमार, हिमानी और वॉर्ड बॉय सूरज सिंह को भी अपने कर्तव्यों के प्रति असंवेदनशील माना गया है। उनको कड़ी चेतावनी जारी की गई है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। बागेश्वर अस्पताल में तैनात डॉक्टर भुरेंद्र घंटियाल को भी स्वास्थ्य विभाग ने कड़ी चेतावनी जारी की है और उन्हें अपने कर्तव्यों प्रति उदासीन बताया है। इसके साथ ही उन्हें भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति न होने के निर्देश दिए हैं। अस्पताल में तैनात बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अंकित कुमार पर भी संघर्षरत बालक के इलाज में लापरवाही बरतने के आरोप लगे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ होने के चलते पहली नजर में ही दोषी मानते हुए उनके खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज किये जाने के आदेश दिए गए हैं।
उत्तराखंड के स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने बयान जारी करते हुए कहा कि बागेश्वर अस्पताल में हुई घटना अत्यंत दुखद है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की हेल्थ सर्विसेज में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्वास्थ्य महकमे को साफ संदेश दिया गया है कि हर अधिकारी और कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी का पूरी तरह से पालन करे। नहीं तो कठोर कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

