पंचायत  पद पर आरक्षण को लेकर प्रदेश की सियासत हुई गरम, प्रीतम सिंह ने कोर्ट जाने की चेतावनी दी

देहरादून: पंचायत  पद पर आरक्षण को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। हाल ही में कांग्रेस पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने प्रेस वार्ता करते हुए इस बात का अंदेशा जताया था कि अगर सरकार की नियत साफ होती तो त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतगणना से पहले आरक्षण की स्थिति साफ कर देती।इधर मतगणना के बाद आरक्षण की सूची जारी होने पर कांग्रेस पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने भी बयान दिया है कि मेरे बेटे को रोकने के लिए देहरादून के आरक्षण में छेड़छाड़ की गई है। उनके करीबी माने जाने वाले कांग्रेस पार्टी के पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा ने आरोप लगाया कि यह स्पष्ट हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी पूरे देश के अंदर सरकारी तंत्र को इस्तेमाल करके राजनीतिक पार्टियों को दबाने का काम कर रही है। लेकिन प्रदेश में कांग्रेस पार्टी किसी भी सूरत में भाजपा से दबने वाली नही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से भाजपा ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के परिणामों के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर आरक्षण की सूची जारी की है, यह अपने आप में बड़ा प्रश्न चिन्ह लगाता है। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद भाजपा सरकार ने जिला पंचायत अध्यक्ष पदों पर नियम विरुद्ध आरक्षण लागू किया है, इसको लेकर कांग्रेस के तमाम साथी चर्चा भी कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि इसके विरोध में जिले के अंदर आपत्ति भी दर्ज की जाएगी, इसके अलावा प्रीतम सिंह ने साथ शब्दों में यह कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो न्यायालय की शरण भी ली जाएगी, लालचंद शर्मा का कहना है कि कांग्रेस पार्टी पूरी ताकत के साथ इस लड़ाई को लड़ने जा रही है। वहीं  भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनबीर चौहान ने बयान जारी करते हुए कहा कि आरक्षण नहीं बल्कि परिवारवाद की फिक्र में कांग्रेस पार्टी के घड़ियाली आंसू बह रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव के बाद आए नतीजों को लेकर हवाई दावे कर रही कांग्रेस पार्टी अब आरक्षण को लेकर घड़ियाली आंसू बहा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की असल चिंता परिवारवाद को लेकर है। और पार्टी के सभी नेता इस पर समर्थन जता रहे हैं। चौहान ने कहा कि कांग्रेस द्वारा उत्पन्न तमाम बाधाओं के बाद भी निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष चुनाव कराए लेकिन अब कांग्रेस एक नई चिंता में डूब गई है। जबकि कांग्रेस अच्छी तरह वाकिफ है कि आरक्षण नियमों के अनुरूप होगा। दरअसल कांग्रेस को महिलाओं एससी एसटी ओबीसी के अधिकारों की कोई चिंता नहीं है। बल्कि वह कुछ निश्चित जिलों को लेकर परेशान है।

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