गुड़ की कटक के साथ चाय पर हरीश रावत ने अपने समर्थकों के साथ राज्य के रोड मेप पर भी चर्चा की, कुल 41 महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए

देहरादून : उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मंगलवार को गुड़ की कटक के साथ चाय पर कांग्रेस जनों और अपने दोस्तों को आमंत्रित करके राज्य के विकास के भावी रोड मैप पर लंबी चर्चा की।

अपने डिफेंस कॉलोनी स्थित आवास पर आयोजित किए गए कार्यक्रम में उन्होंने अपने समर्थकों को पर्वतीय आलू के गुटकों, पिंडालू के साथ-साथ मीठे अमरूदों का स्वाद भी चखाया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि गुड़ की गटक के साथ चाय उत्तराखंडी परिवेश का परिचायक रहा है, गुड को कॉटेज इंडस्ट्री के रूप में विकसित करना भी हमारे इसी संकल्प का परिचायक है।

उन्होंने कहा कि हमारी पहचान जिन उत्पादों के साथ जूड़ी हों, उनमें एक गुण जरूर होना चाहिए। हरीश रावत ने कहा कि पर्वतीय आलू और पिंडालू हमारे व्यावसायिक व्यंजन का हिस्सा हो सकते हैं। इनमें स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट इत्यादि कम मात्रा में होता है, इसलिए यह स्वास्थ्य के लिए उतने हानिकारक नहीं हैं।

मगर हम आलू और पिंडालू को अपने नाश्ते की सूची में सम्मिलित नहीं करवा पा रहे हैं, इसलिए इसे ब्रेकफास्ट मैन्यू मे सम्मिलित करवाने के लिए ऐसे प्रयास अवश्य करने चाहिए।

हरीश रावत का कहना है कि अमरूद उत्पादन के क्षेत्र में भी उत्तराखंड बड़े पैमाने पर आगे बढ़ रहा है, हम सब चाहते हैं कि मार्केट में आकर यही अमरूद उत्तराखंड का उत्पाद के रूप में परिचारित हो। उनका कहना है कि हरिद्वार, नैनीताल, उधम सिंह नगर और यहां तक की देहरादून जिले के कुछ क्षेत्र अमरूद उत्पादन मे आच्छादित हो रहे हैं।

आज इसी परिचर्चा में इन्हीं उत्पादों के इर्द-गिर्द और राज्य के विकास के भावी रोड मैप पर आधारित सुझाव आमंत्रित किए गये। इनमें से कई लोडेड सुझाव उन्हें प्राप्त हुए हैं।

इन सुझावों को कांग्रेस पार्टी को भी उनकी ओर से प्रस्तुत किया जाएगा, इनमें से कुछ महत्वपूर्ण सुझाव ऐसे भी हैं, जिन्हें आने वाले भविष्य में पार्टी के मेनिफेस्टो कमेटी के समक्ष रखा जाएगा। इन सुझावों को और डायवर्सिफाइड करके हम एक बार फिर नींबू सन्नी के साथ फिर से खुली बहस करेंगे।

दरअसल आज गुड़ के साथ चाय पर हुई खुली परिचर्चा में विभिन्न जिलों से सामाजिक समूह से जुड़े लोगों ने कई सुझाव भी दिए। तो वहीं वहां मौजूद कांग्रेसियों ने खुले मन से पार्टी की कई कमियों को भी हरीश रावत के समक्ष रखा। कांग्रेसियों ने कहा कि हमें ऐसा क्या करना चाहिए कि हम 2027 में कांग्रेस की सरकार बना सकें।

कुछ कांग्रेसी महिला नेत्रियों ने पहाड़ की जर्जर स्वास्थ्य सुविधाओं का मामला उठाते हुए कहा कि पहाड़ों में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव का खामियाजा सबसे ज्यादा महिलाओं और बच्चों को उठाना पड़ रहा है, तो वहीं कांग्रेस सेवा दल की प्रदेश अध्यक्ष हेमा पुरोहित ने हरीश रावत के सामने संगठन की कई खामियों को गिनाया ।

तो किसी ने पार्टी में कार्यकर्ताओं की अनदेखी किए जाने की भी शिकायत की। हालांकि इस खुली बहस में हरीश रावत को 41 महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए हैं, जिनको उन्होंने बड़ी गौर से सुना और सबको अपनी बात रखने का अवसर दिया। हालांकि इस दौरान कांग्रेस जनों की ओर से दिये गये अधिकतर सुझाव लगातार कमजोर हो रहे संगठन पर फोकस रहे।

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