राजधानी देहरादून में लगाई गई राष्ट्रीय लोक अदालत में एक ही दिन में 9080 मामलों का हुआ निस्तारण, दूसरी बार राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया

देहरादून : राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून के तत्वावधान में शनिवार को जिला मुख्यालय देहरादून, बाह्य न्यायालय ऋषिकेश, विकासनगर, डोईवाला, मसूरी एवं चकराता के न्यायालयों में साल 2026 की दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत लगाई गई।

इस लोक अदालत में मोटर दुर्घटना क्लेम, सिविल मामले, पारिवारिक मामलें, चैक बाउन्स से सम्बंधित मामलें, शमनीय प्रकृति के आपराधिक मामलें तथा अन्य प्रकृति के मामले लगाये गये थे।  लोक अदालत में देहरादून में फौजदारी  के 251 मामलें, चैक सम्बंधी 515 मामले, धन वसूली से जुड़े 17 मामले, मोटर दुर्घटना क्लेम ट्राईबनल के 14 मामले पारिवारिक विवाद के 105 मामले, पब्लिक यूटिलिटी सर्विस के 26 मानले, मोटर वाहन अधिनियम के तहत शमनीय अपराधों के 4835 मामलें, उपभोक्ता फोरम सम्बंधी 12 एवं अन्य सिविल प्रकृति के 34 मामलों, आर्बिट्रेशन सम्बंधी के 9 मामले, अन्य समझौते योग्य 26 मामले समेत कुल 5844 मामलों का निस्तारण किया गया और 13,36,35,816 रूपयों की धनराशि पर समझौता हुआ।

इसके साथ ही बाह्य न्यायालय, विकासनगर के न्यायिक अधिकारियों की तरफ से लोक अदालत में कुल 978 मामलों का आपसी राजीनामे के आधार पर निस्तारण किया गया, जिसमें कुल 22,67,653 रुपये की धनराशि पर समझौता किया गया । बाह्य न्यायालय ऋषिकेश के न्यायिक अधिकारियों ने लोक अदालत में कुल 537 मामलों का निस्तारण किया,और कुल 2,31,40,051 रुपये की धनराशि पर समझौता किया। बाह्य न्यायालय डोईवाला की ओर से 242 मामलों का निस्तारण कर कुल 22,80,000 रूपये की धनराशि पर समझौता किया गया। इसी तरह बाह्य न्यायालय मसूरी के 56 मामलों का निस्तारण कर कुल 47,55,492 रूपये की धनराशि पर समझौता किया गया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून की सचिव, वरिष्ठ सिविल जज सीमा डुंगराकोटी ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालतें न्याय प्रणाली की गरिमा को सुदृढ़ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं।

लोक अदालतों के माध्यम से आपसी सहमति सौहार्द एवं संवाद की भावना को प्रोत्साहन मिलता है, जिससे समाज में शांति, भाईचारे, सामंजस्यपूर्ण वातावरण का निर्माण होता है। उन्होंने बताया कि लोक अदालतें आमजन को सरल, सुलभ एवं त्वरित न्याय उपलब्ध कराने का एक सशक्त एवं प्रभावी माध्यम है। लोक अदालतों में पारित किए गए निर्णय अंतिम एवं बाध्यकारी होते हैं तथा प्रकरणों के निस्तारण उपरांत पक्षकारों को उनके द्वाना जमा किया गया न्याय शुल्क भी वापस किया जाता है।

इस राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न बैंकों व अन्य संस्थानों के प्री-लिटिगेशन स्तर के मामले भी निस्तारित किये गये। इस लोक अदालत में प्री-लिटिगेशन स्तर के कुल 3236 गामलों का सफल निस्तारण किया गया तथा 2,18,40,185 रुपये की धनराशि पर पक्षकारों के बीच समझौता हुआ।

 

 

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