देहरादून : मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट संघ ने सरकार से आईपीएचएस 2012 मानकों के अनुरूप राज्य में लैब टेक्नीशियन के पदों को शीघ्र सृजित किए जाने की मांग उठाई है।संघ का कहना है कि उत्तराखंड राज्य गठन से पहले से ही प्रदेश में बीएससी एमएलटी कोर्स संचालित हो रहा है, जिसमें हर साल सैकड़ो की संख्या में छात्र-छात्राएं उत्तीर्ण होते हैं।
लेकिन बड़े दुख की बात है कि राज्य गठन के 26 वर्षों बाद भी प्रशिक्षित युवाओं के लिए अब तक कोई स्पष्ट सेवा नियमावली तैयार नहीं की गई है। टेक्नोलॉजिस्ट संघ के प्रदेश महासचिव मयंक राणा ने कहा कि पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर आईपीएचएस 2012 मानकों के अनुरूप पदों के सृजन और सेवा नियमावली का विस्तार तैयार किया गया था, लेकिन शासन स्तर पर बार-बार आपत्तियां लगाकर इस प्रस्ताव को निरस्त कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में सरकार ने कई सरकारी लैब को निजी लैब सेंटरो के माध्यम से ठेके पर संचालित किया जा रहा है जिसमें स्थायी रोजगार के अवसर लगातार समाप्त होते जा रहे हैं। संगठन ने इस व्यवस्था का विरोध किया है और कहा है कि समय-समय पर इन निजी लैब की जांच रिपोर्ट में गंभीर विसंगतियां सामने आई है, जिस कारण उनकी विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
संघ के प्रदेश महासचिव ने कहा कि सरकार के पास समय-समय पर कुशल रजिस्टर्ड और प्रशिक्षित डिग्री धारक लैब टेक्नीशियन उपलब्ध हैं, जो सेवाएं मिलने पर पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार हैं।
इसके साथ ही सुदूरवर्ती इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों और पर्वतीय क्षेत्रों में लैब टेक्नीशियनों की भारी कमी के कारण आम जन को छोटी-छोटी जांचों के लिए भी दूर दराज के क्षेत्रों मे जाना पड़ता है , जिस कारण उनका समय भी जाया होता है और धन की बर्बादी भी होती है। ऐसे में कई वर्षों के संघर्ष और उपेक्षा के बाद राज्य के बेरोजगार लैब टेक्नीशियन खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।
मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट संघ ने पुरजोर तरीके से आईपीएचएस 2012 मानकों के अनुसार राज्य में लैब टेक्नीशियन के पदों को जल्द सृजित किए जाने की मांग की है और सभी रिक्त पदों को वर्षवार मेरिट के आधार पर पारदर्शी तरीके से भरने की मांग उठाई है।

