राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर महर्षि ने उठाये सवाल,कहा हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड सर्वाधिक आपराधिक घटनाओं वाला राज्य बना

देहरादून : उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेता और  मीडिया कोऑर्डिनेशन कमेटी के प्रमुख राजीव महर्षि ने प्रदेश मे दिन प्रतिदिन बिगड़ती कानून व्यवस्था पर सवाल उठाये हैं। उन्होंने कहा कि आए दिन एक के बाद एक घट रही दुर्दांत घटनाओं के चलते उत्तराखंड सर्वाधिक आपराधिक घटनाओं वाला राज्य बन गया है।

महर्षि ने सोमवार को मीडिया को जारी बयान में कहा कि राज्य सरकार इन दिनों चार साल बेमिसाल का  राग अलाप रही है, जबकि धरातल पर अपराधों की बाढ़ आ रखी है। अभी तक उत्तराखंड हिमालयी राज्यों में ही सर्वाधिक अपराध वाला राज्य था लेकिन अब तो देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश को भी पीछे छोड़ रहा है।

इससे स्पष्ट है कि राज्य में पुलिस का ख़ौफ़ खत्म हो गया है और अपराधी खुलेआम वारदातें करके फरार हो जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार की भरसक कोशिश शराब से राजस्व जुटाने की है। इस साल भी प्रदेश में लोगों की इच्छा को ताक पर रख कर शराब की 65 नई दुकानें खोल दी गई हैं। देर रात तक खुल रही शराब की दुकानें अपराध वृद्धि का सबब बन गई हैं।

शांतिप्रिय कहे जाने वाले उत्तराखंड के लिए यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। अभी हाल में देश के दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाले सेना से सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर मुकेश जोशी की आपराधिक तत्वों के हाथों बेवजह मौत की घटना ने पुलिस की कार्यशैली को सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया है।

यदि पुलिस के अपराधियों के खिलाफ इरादे बुलंद होते तो इस तरह की घटना नहीं होती। आपराधिक तत्वों का हथियारों के साथ उत्तराखंड में टहलना पुलिस की नाकामी को दर्शाता है।

उन्होंने आशंका जताई कि आने वाले दिनों में दून एक्सप्रेस वे शुरू होने के बाद इस तरह की घटनाएं और अधिक बढ़ सकती हैं कयोंकि पश्चिम उत्तर प्रदेश से देहरादून की दूरी काफी कम हो जायेगी।

महर्षि ने कहा कि चार साल पहले अंकिता हत्याकांड के बाद से समूचे प्रदेश में आपराधिक वारदातों का सिलसिला तेज हुआ है और पुलिस किसी भी वारदात को रोकने में नाकाम रही है। आज स्थिति यह है कि तमाम हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड अपराधों के मामले में शीर्ष पर है।

चार साल बेमिसाल का ढोल पीट रही सरकार इस ओर से आँखें मूंदे हुए है। महिलाओं, बच्चों के विरुद्ध अपराधों में बेतहाशा वृद्धि भविष्य के लिए गंभीर खतरे का सायरन बजा रही है लेकिन प्रदेश की पुलिस बेपरवाह है।

उन्होंने कहा कि मित्र पुलिस को अपराध नियंत्रण के लिए हिम्मत दिखानी होगी। लेकिन  पुलिस को फ्री हैंड दिए बिना यह संभव नहीं है। केवल देवभूमि का राग अलापने से काम चलने वाला नहीं है। देवतुल्य जनता, देवतुल्य लोग कह कर काम चलने वाला नहीं है, लोगों को यह भरोसा दिलाना भी जरूरी है कि सुबह शाम यदि वे घर से बाहर निकल रहे हैं, चाहे वे सैर पर क्यों न हों, यह गारंटी होनी चाहिए कि वे सुरक्षित घर लौट आयेंगे।

उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था की जितनी लचर स्थिति उत्तराखंड में है, वह राज्य स्थापना के बाद सर्वाधिक चिंताजनक स्थिति में है। पूरे प्रदेश में लोग त्राहिमाम कर रहे हैं जबकि सरकार अपने गुणगान में इस कदर मस्त हैं कि लोगों की पीड़ा उन्हें सुनाई ही नहीं दे रही है।

महर्षि ने कहा कि अभी तक हरिद्वार और उधम सिंह नगर ही आपराधिक ग्राफ में सबसे ऊपर थे, अब राजधानी देहरादून सबसे ऊपर आ गया है। आए दिन हत्या, लूट, दुष्कर्म और अन्य आपराधिक घटनाओं से लोगों ने असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो रही है किंतु सरकार को जन सरोकारों से कोई लेना देना नहीं है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सरकार ने कानून व्यवस्था को सुधारने की दिशा में कोई ठोस कदम नही उठाया तो विवश होकर कांग्रेस को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा

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